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कविता "रक्षाबंधन"

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सुबह सुबह हो गयी लड़ाई  न तू मेरी बहना न मैं तेरा भाई सुबह सुबह हो गई लड़ाई कट्टी करके चूम लिया है सात चक्कर घूम लिया है खिलौनों पर क़सम चढ़ाई सुबह सुबह हो गयी लड़ाई गुल्लक से पैसे निकाले लेकर आया बड़ा पारले पानी मे भीगाकर खाया और उसको ठेंगा दिखलाया वो भी जा ले आई मिठाई  जीभ दिखाकर मुझे चिढाई सुबह सुबह हो गयी लड़ाई न तू मेरी बहना न मैं तेरा भाई मैं चिल्लाया बड़े ज़ोर से बड़ी दीदी फिर आई दौड़के मैंने उसकी करी शिकायत चुराई देखो इसने मिठाई सुबह सुबह हो गयी लड़ाई उसने भी मेरा बतलाया   पैसा मेरा कहाँ से आया दीदी को फिर गुस्सा आया दोनों की हो गयी पिटाई सुबह सुबह हो गयी लड़ाई दोनों से नाराज़ हुआ मैं नहीं करूंगा बात कभी मैं फिर अगले दिन राखी आई दोनों थाल सजाकर ला आरती चंदन राखी मिठाई भूल गया मैं सारी लड़ाई  है तू मेरी बहना मैं तेरा भाई सुबह सुबह हो गयी मिताई मिलकर खाई खूब मिठाई।।