कविता "बीएनए बैच 18 - 20 के नाम"

एक दौर ऐसा 
जो था अपने मे सम्पूर्ण
नहीं थी ज़रूरत उसे
भूत और भविष्य की
वो खुद में समेटे 
भूत भविष्य वर्तमान
एक भरा पूरा युग था 
और हम खड़े थे उसमे
पूरे ज़िंदा 
सोख लिया उसके 
हर एक कतरे को 
ऐसे जैसे शाश्वत समय
सोख लेता है सब कुछ
उस युग के साक्षी साथियों
कहो...हैं न एहसास
एक अदभुत आनन्द का 
कि हमने पूरे ज़िंदा होकर 
जिया है एक पूरा युग 
जो था अपने मे सम्पूर्ण

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