कविता "अगर तुम सच में मुझे छूना चाहते हो"

अगर तुम सच में
मुझे छूना चाहते हो
तो छुओ कभी 
इस रौशनी की तरह 
कि चमक उठूं मैं
तुम्हारे रंग में
और ऐसे में हमेशा 
आँखे बन्द कर लेता हूँ मैं 
नहीं देखना चाहता 
क्या क्यों कौन कैसे 
बस जीने लगता हूँ 
एहसास को पकड़ कर।।

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