Mother's day sepecial story "मम्मी बनाम अम्मा"
painting - Ayushi bandil “मम्मी बनाम अम्मा”
मेरी माँ, जिसे हम पहले अम्मा कहते थे। पर बड़ी दीदी के दिल्ली (चाचा के
घर) से लौटने के बाद से घर थोड़ा मॉर्डनाइज किया जा रहा था, जिसके तहत अम्मा को मम्मी
कर दिया गया। पर नाम बदल देने से इंसान थोड़ी ना बदल जाते हैं। मेरी अम्मा कभी मम्मी
नहीं बन पाईं। मम्मी मतलब... जैसे मुकेश की मम्मी वैभव की मम्मी अंकित की मम्मी। ये
सब हैं असली मम्मियाँ कितना प्यार करती हैं अपने बच्चों को। सुबह उठने से लेकर रात
को सोने तक हर एक चीज़ का ध्यान – मेरा बेटा नहाया कि नहीं, खाया कि नहीं, जो मिठाई
आई थी उसे मिली की नहीं, जैसी हर चीज़ का ध्यान। और एक अनपढ़ गंवार मेरी अम्मा। किसी
चीज़ से कोई मतलब ही नहीं, सिवाय मारने और डांटने के। खेलने चले तो मार, टीवी देखने
चले गए तो मार, लड़ाई हो गई तो मार, चोट लग गई तो मार। असल में मेरी माँ का प्यार, ममता,
भवना जैसे शब्दों से कोई वास्ता ही नहीं था। मैं फिल्मों के नायक की माँ और आस – पास
की मम्मियों से अपनी माँ की तुलना करता और फिर अपने भाग्य और भगवान को कोसते हुए खूब
रोता। मुझे लगता मेरी माँ, माँ होने के लायक नहीं, भगवान ने गलती से उन्हें माँ का
दर्जा दे दिया है। मैं धीरे – धीरे उनसे दूर होता गया। फिर हमारे बीच सिर्फ इतना रिश्ता
रह गया कि मैं रात को उनके पास सोता। और शायद ये कोई प्यार नहीं, बचपन से चली आई एक
आदत थी।
फिर हाईस्कूल के बाद मैंने घर छोड़ दिया। फैजाबाद शहर में पढ़ने लगा। या
यूं कहें कि मैं घर से भाग गया और शहर में अकेले रहने लगा। अब जब छुट्टियों में घर
आता तो थोड़ा – बहुत प्यार कभी – कभी दिख जाता उनके अंदर। लेकिन ये काफी नहीं था, मैं
अब भी यही मानता था कि उन्हें गलती से माँ का दर्जा मिला है।
फिर इंटर के बाद मैं लखनऊ आ गया। अब दो तीन महीने के अंतराल पर घर जाने
लगा। अब प्यार थोड़ा ज़्यादा दिखने लगा था उनमें। वो भी डारेक्ट नहीं इनडारेक्ट। जैसे
– किसी काम में, बात में, छूने में, कुछ खिलाने या बीमार होने पर और ऐसे बहुत से तरह
से। मैं समझ नहीं पा रहा था कि वो अब प्यार दिखाने लगी थीं, या मेरे रंगमंच, कहानी,
कविताओं, की दुनिया से जुड़ने की वजह से मुझे अब दिखने लगा था जो मैं पहले नहीं देख
पता था। जो भी हो अब मुझे कुछ अच्छा लगने लगा था। अब मैं जब घर जाता, तो उनके साथ लेटकर
घर – परिवार – रिश्तेदार, गाँव और काम – धाम पर लम्बी चर्चा करता। जो उन्हें भी काफी
संतुष्ट करता और मुझे भी।
फिर उस बार दशहरे में मैं पहले से घर नहीं गया, दीपावली के दिन ही पहुँचा।
बहुत ही खुश और उत्साहित। मैं लोगों के पूछने और ना पूछने पर भी, घूम – घूम कर सबको
बता रहा था, कि क्यों इस बार मुझे छुट्टी नहीं मिली और बस एक ही दिन के लिये आया हूँ
कल चला जाऊँगा। असल में लखनऊ से मुंबई शो करने जा रही एक टीम में मेरा चयन हुआ है,
और मैं मुंबई जा रहा हूँ, शो करने...😁। “मुंबई”
मेरे सपनों का शहर...। मैं बहुत खुश था, और मेरे साथ पूरे घर वाले।
दूसरे दिन सुबह, जल्दी – जल्दी तैयार होकर मैं निकलने लगा। चाची के घर
से सबके पैर छूकर आया, फिर दीदी के पैर छुए, फिर बुआ के फिर पापा के, माँ नहीं दिख
रही थी, तो पूजा के कमरे की ओर गया। माँ पूजा कर रही थी। मैं चौखट पर खड़ा हो गया, माँ
कुछ मंत्र बुदबुदाते हुए चौखट पर आई। मैंने पैर छुआ, उन्होंने आशीर्वाद दिया। वही पुराना
– खुश रहो भगवान बनाए रखें रोजी रोटी बनी रहे..., और मैं जल्दी से बाहर आ गया, बैग
उठाया चल दिया। सब बाहर तक आए पर माँ नहीं। मैं थोड़ा आगे तक गया, फिर अचानक पता नहीं
क्या मन में आया। मैं मुड़ा और सीधा घर के अंदर चला गया, तो देखा, माँ वहीं चौखट पर
खड़ी थी। मैं बिना कुछ कहे उनसे लिपट गया। पहले तो उन्हें अटपटा सा लगा। फिर धीरे से
उन्होंने पूरी ममता के साथ मुझे समेट लिया। जाओ अच्छे से करो और सफल हो... कहते हुए
उनका स्वर भर्रा गया। अलग हुआ तो देखा, उनकी आँखों से आँसू आँसू झर रहे थे। उनके चेहरे
का एक – एक कतरा फड़क रहा था। मैं बिना कुछ बोले पलटा और सीधा निकल गया।
रास्ते भर उनका वो चेहरा, उनके आँसू, उनकी छुअन मेरे मन में अजीब ढंग से
उमड़ – घुमड़ रहा था। और मैंने अपने अंदर कुछ अलग, अद्भुत
महसूस किया। जैसे – हिमालय तेजी से पिघलने लगा और ठंडे पानी की धार सिर से पाँव की
ओर गिरने लगी, या जैसे – सारे महासागर घनघोर घटा बन कर मन की जमीन पर झमाझम बरसने लगे,
या जैसे – चारों दिशाओं की हवाएं मस्त बयार बन कर शरीर के हर कण को सहलाने लगी।
अब मैं अपनी माँ से अथाह मोहब्बत करता हूँ। और उनकी मोहब्बत जो वो दिखा
नहीं पाती किसी ना किसी ढंग से निकलवा ही लेता हूँ। और अम्मा मम्मी से परे अब मैं उनकी
दिव्यता को महसूस कर पाता हूँ...।।।
प्रदीप्त दीप
माँ के अनकहे प्रेम को खूबसूरती से उकेरने का बेहतरीन प्रयास....माँ माँ होती है शहर की हो या गाँव की बस कुछ माएँ अपने प्यार को शब्दों में व्यवहार में जता नहीं पाती...
जवाब देंहटाएंbahut sundar....
जवाब देंहटाएंBahut achchhi awr pyari story❤️
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